पिघलता हुआ भाप

मेरे साथ कल्पनाओं में जाने का हुनर ​​तो खूब है तुम में
जितना गहरा ले जाति हूं
उतना गहरा देख लेते हो तुम
डूब जाते हो साथ में

आज किस पन्ने में खोये हो?
तुम्हारा दरवाजा खटखटा रही हुं शाम से
कब आओगे लौट कर?
आधी रात हो गई है

कई दिन हो गए
तुम निराश लगते हो
मुझसे निराश हो?
मैं तो अंत-हिन हुं
बहुत दूर चलना है
रस्सी पकड़ लो
कहीं खो गए तो खो जाओगे तुम
इतिहास के पन्नो में नहीं मिलूंगी मैं तुम्हे
आज का पन्ना अभी खाली है
नीला समंदर बनकर

पहले सोच लो
जितना डूबोगे
उतना गहरा होता जाएगा ये सफर
समुंदर के अंदर
रोशनी के पीछे
पुराने जहज के लकड़ी के निचे
चमकीली कहानी सुन्ते सुन्ते
तुम्हें रुक रुक कर ले जाऊंगी

सुनो, आंखें दिखाओ इधर
मस्कुराती हुए आंखें किसको दे आए?
ये हेयरन परेशान आंखें, उदासी भरे हुए
किससे मांग लाए?
जाओ लौटा कर आओ
तुम्हारी सुनहरी आंखें ढूंढ रही हूं मैं
शाम से
आवाज भी लगाई
पानी कहता है तुम घूम हो कहीं दूर

पर कौनसे पन्ने पर?
मुझे रंग, पंक्ति या अंक बताओ
मैं भी आऊं
देखूं
छू वू

सांस ले ली बहुत
अब चलो दुसरे शहर
ईस समंदर के रास्ते एक छेद है
दुसरे शहर की रोशनी दिखती है
उधर से चलो हमारा भाप दिखाएं
हमारा घुलता हुआ रंग दिखाएं
उस शहर को घूम आए

 

15th August, 2022
1:30am

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